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My poetry is not for foreplay. It's for after sex.

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My poetry is not for foreplay. It's for after sex. When you'll light the Marlboro and move to your side of the bed, my poems will be the breath of fresh air in a room filled with smoke. But do not underestimate me. My poems won't be sweet, gentle or mellow. They will be brazen, brutal and bold. I will present them on a sharply-edged knife. The blood on the knife will be hot. Fresh from the wounds I don't allow to heal. You will take a drag from Marlboro - but served with my sinful words - you will feel as if you've snorted cocaine. You will not get high, though. You will see the world in a different light. Murky lanes leading to posh hotels, board rooms and high-rise apartment buildings. In one of those aesthetically decorated rooms, you will see a man f*****g someone's life just for a little pleasure. You will see him getting hard on someone's misery. A woman pleasuring herself while watching a wrecked home that she takes all credit for. To watch

वो 90 के दशक की आशिक़ी

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  वो पीले फूलों का बाग़ वो हल्के रंगो की शाम  तुम वही मिलना मुझसे  जिस मोड़ पे आख़िरी बार लिया था मेरा नाम इत्तेफ़ाक़ से मिले थे हम और शिद्दत से निभाया था हमने प्यार कहाँ वो 90 के दशक की आशिक़ी और कहाँ आजकल का हैशटेग-वैशटेग सा व्यापार दिन गुज़ारे थे साथ हमने  बांधा था सपनों का संसार कब सोचा था मैंने कि मैं रह जाऊँगी दिल्ली में और तुम बस जाओगे सात समुंदर पार  सुना है वहाँ बर्फ गिरती है खूब  लोग वहाँ चाय कम कॉफ़ी ज़्यादा पीते हैं  और यहाँ चाय की हर एक चुस्की पे जनाब कॉलेज के दिनों को हम लाखों बार जीते हैं  बहुत उधेड़ बून करती हूँ मैं बहुत सोचती हूँ तुम्हारे बारे में  तुम काफ़ी आगे बढ़ गाये और मैं रह गई किनारे पे  खनक आज भी है  तेरी मद्धम सी आवाज़ की ज़िंदा मेरी बचकानी बातों पे  तुमने नहीं किया था मुझे कभी शर्मिंदा  रेत से थे तुम  तुम्हें मुट्ठी में बांध नहीं पाई कहाँ सागर, कहाँ साहिल  और ये हज़ार मीलों की जुदाई सुना है तुम दिसंबर में आ रहे हो हर बार की तरह 4 हफ़्ते के लिए तुम हमेशा लाते हो महंगे तोहफे  और मैंने तुम्हे सिर्फ ताने ही दिए  क्या कोई नाम है इस रिश्ते का  क्या कोई हक़ है मेरा

Rewind - August 2022

I have not been very productive for a month now. But I am having a good time with my nephew. It's fun and insightful to watch a baby grow. There is so much adults can learn from them. I wrote only 2 couplets in August. Date Published 08/17/2022 वक़्त बदलते ही जो बदल जाए  ऐसे दोस्तों को बदल देना चाहिए  08/30/2022 कितना बड़ा धोखा मिला होगा उसे कि वो इश्क़ के नाम पे तिलमिला जाता है Hoping September will be a hell lot productive in terms of creative writing. Love, Saru

Rewind - July 2022

This is what I wrote in July + 35000 words. Damn, there is still no end in sight. Wish me luck, though. Date Published 07/02/2022 Aap haunsla rakhiye Manzil pe pahunchte hi Aapko apna safar Sabse zyada khoobsurat lagega Janaab udd toh sabhi sakte hai Bas pankh phailane ka junoon hona chahiye Maa ne kaha dhoop hai Maine maan liya Ab uske jitni thaandi chhanv Nahi di hai na aaj tak kisi ne 07/04/2022 जिसने मुझे मेरे बुरे वक़्त में सहलाया  वही मेरे दिल को भाया 07/07/2022 जो बेवज़ह ख़ुश हो  बस वो बंदा कमाल है ना घरवालों से कोई अपेक्षा ना दुनिया से उसे कोई सवाल है 07/11/2022 अब ले जितने इम्तिहान लेने है ज़िन्दगी पास फ़ैल का डर नौसिखियों को लगता है Ab le jitne imtihaan lene hai zindagi Pass-fail ka darr nausikhiyon ko lagta hai 07/22/2022 ऐसे दोस्त किस काम के जो साले मजाक ना उड़ाए और जिस दिन तुम्हारी ज़िन्दगी का सत्यानाश हुआ हो दो पेग दारु न पिलाये

यूँ दो चार घंटे के लिए नहीं

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फ़ुर्सत में मिलना मुझसे यूँ दो चार घंटे के लिए नहीं  सिर्फ़ हाल चाल नहीं पूछना बातें करनी है तुमसे कई देखना है तुम्हें एक टक शिकवे करने है तुमसे कई हज़ार जब नाराज़ हुए थे तुम मुझसे और जब छेड़ा था मुझे बीच बाज़ार चवन्नी-अठन्नी सा ढोंग मत करना मान लेना मेरे हर कहे को सुबकियाँ से काम मत चलाना बेहने देना ग़र आँसू बेहे तो  सख़्त होने का दिखावा छोड़ आना नुक्कड़ वाले बनिये की दुकान पे सिद्दत से एक बार बोल देना  कि गलती होती है इंसान से तुम मुझे छोड़ गए उसका तुम्हें कभी अफ़सोस हुआ है क्या मैं नहीं तुमसे पूछूँगी  कि मेरे बाद मेरी तरह किसी को छुआ है क्या  ना मैं इस युग की मीरा हूँ  ना हो तुम मेरे घनश्याम बस इश्क़ है तुमसे बेपन्नह मुझे बाक़ी सब कुछ है मुझमें आम  तुम भी सोचते होगे ना  यह तीली सा इश्क़, ज्वालामुखी कब हुआ यूँ समझ लो तुम्हारे जाने के बाद तुम्हारे ख़याल ने दिन में 100 बार मुझे छुआ अब गणित में तो तुम अव्वल हो हिसाब लगा ही लोगे पर सोच के आना जनाब  पिछले 15 सालों का हिसाब कैसे दोगे  तो आना बस फ़ुरसत में  यूँ दो चार घंटे के लिए नहीं  सिर्फ़ हाल चाल नहीं पूछना बातें करनी है तुमसे कई

Rewind - June 2022

June was productive in terms of content creation. I am reciting my poetry in reels. I am feeling good about it. I wrote the following in June. Date Published 06/05/2022 मुझे आज़माना अपने बुरे वक़्त में मेरे दोस्त  मैं मौसम की तरह वफ़ा नहीं बदलती इतनी कड़वाहट बातों में कहाँ से लाती हो घमंडी दोस्तों ने बनाया है या खुद चने के झाड़ पर चढ़ जाती हो अंग्रेजी पियो या देशी  शराब दुःख बहार लाती है, कम नहीं करती 06/07/2022 फ़िक्र मुझे इस बात की है  कि मैं डूब गई तो तुम्हारा सहारा कौन बनेगा  06/14/2022 ऐ दिल थोड़ा खुद पे रहम थोड़ा खुद पे ए'तिबार कर जितना औरों से किया उम्र बार एक बार खुद से उतना प्यार कर 06/23/2022 आप रहने दीजिये ये इश्क़ आपके बस की बात नहीं मुझे उम्र भर का चाहिए हफ्ते, दो हफ़्तों का साथ नहीं Aap rehne dijiye Ye ishq aapke bas ki baat nahi Mujhe umar bhar ka chahiye Hafte, do hafte ka saath nahi 06/29/2022 लगता है अपनों को समझाने की कोशिश  उसने आज भी काफी की  उसकी आवाज़ में सुकून कम  सिलवटें बहुत ज़्यादा थी Lagta hai apno ko samjhane ki koshish Usne aaj bhi kaafi ki Uski awaaz m

Rewind - May 2022

I didn't write anything in April. I was editing my book and I stopped midway. I went to meet my family and completed other important tasks. I want to diversify my blog now. Perhaps speaking would be the next step. Let's see. I wrote the following couplet this month. I felt good. Date Published 05/25/2022 मुझसे दिखावे की उम्मीद मत रखना मेरी नफ़रत में भी तेरी मोहब्बत से ज़्यादा शिद्दत है 05/31/2022 पैसे पे नाचती है दुनिया सारी पर कमबख़्त सिर्फ़ तवायफ़ों के कोठे बदनाम है

Rewind - March 2022

This is what I wrote in March. Not very much. Still I am happy. I am doing what I want to do and simultaneously writing. So far, so good. Date Published 03/03/2022 मेरी ख़ामोशी का सबब वो समझ पाया उसके मेरे दुःख इतने मिलते-जुलते थे 03/05/2022 From all the wonderful things people can do with their tongues, it's a pity they choose to spew hateful words. 03/05/2022 There is a perpetual sadness residing in the deep recesses of poets' hearts. Like a landmine, it explodes when someone walks over it. The anguish, pain and destruction are enough to damage them all over again. And yet like a Phoenix, they rise only to be massacred again by someone they love. 03/09/2022 समाज की माने तो शराब पीने से औरतों का चरित्र कम होता है  और मर्दों का सिर्फ दुःख  कसम से ज़्यादा शराब पी कर भी इतनी बेतुकी बात कोई औरत नहीं कहेगी 03/14/2022 जनाब खुद जैसे खोखले इंसान को समंदर कह के आपने समंदर गंदा कर दिया 03/28/2022 There is a thing with unrequited love - the novelty of it never wears off, the intensity of