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Here's what I learned in 7 years of blogging

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7 years ago I started my blog. And I entered the magical world of writing. I was living in the Boston suburbs. After finishing my work and household chores, I still had some spare time. I remember the exact moment I clicked the 'B' icon on Google and I created a Blogger account. I knew only two Bloggers that time - Amitabh Bachchan and Lisa Ray. I had no idea what it takes to be an accomplished blogger, but I was excited to be a part of a community which is independent and expresses its views without any inhibition. I must say, it has been an amazing journey only because I have learned so much.

I started by writing poetry, then I started writing articles and now I can write anything. Professionally, I am a content writer for a couple of websites. I ghostwrite for two more agencies based out of North America. I write sponsored articles on my blog. I tweet, post Facebook statutes, answer Quora questions, and mention brands on Instagram for money. Brands even consult me for social…

Rewind - June 2020

Poof! Half of the year is gone. The world has changed. We all are learning to live with the new normal. And I am not writing as much as I should. I hope I write more in July purely because writing gives me sanity.

DateContent06/03/2020नशा कितना भी कर लूँग़म उतरता ही नहीं 
Nasha kitna bhi kar loonGum utarata hi nahi06/04/2020बिन बोले सब कह जाती हैंआँखें लफ़्ज़ों की मोहताज नहीं होती06/06/2020होपलेस है सजन हरजाईमैं लाखों सा सवरी पर टिकटॉक पे नासपीटी कार की वीडियो लगाई
Hopeless hai sajan harjaiMain lakhon sa savriPar TikTok peNaspiti car ki video lagai 06/07/2020कुछ ऐसे बदल गए है तेरे जाने के बादग़ैरों से पूछते है खुद का पता
Kuch aise badal gaye hai tere jaane ke baadGairon se poochte hai khud ka pata
06/08/2020

Rewind - May 2020

I learnt a very beautiful yet ordinary thing about writing this month - take a break from it to detox your creative juices.  I wrote very little this month. The last couplet I wrote while waiting for my bank appointment. COVID-19 has changed the world. I hope we emerge better than before and imbibe the lessons to improve our lifestyle.

Date Content 05/01/2020 कुछ ऐसे मेहफ़ूज़ रखा है आपकी यादों को  आप होते तो आपको भी नाज़ होता 05/03/2020 जो दिखायी नहीं देते  बस वैसे घाव दे के गया है वो  05/03/2020 पश्मिने सी स्याही  मिश्री से अल्फ़ाज़ रोम-रोम करता है तेरा आग़ाज़ तू कभी उतरे किसी नज़्म में ऐसे  लोग देखे तुझे एक टूक और हूँ मैं नाराज़ इश्क़ नहीं मैंने गुशताखी की है ...to be completed 05/03/2020 फर्श पे गिरी हुई चीनी भी मिल बाँट के खाती हैं ज़मीन में रहने वाली चींटियों के भी उसूल होते हैं

तुम ठहराव हो...

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कस्तूरी सी सुबह  सतरंगी सी शाम  दिल की तंग गलियों में  लिखा तेरा नाम 
कोई भी सीढ़ी हो तुम उसके पहले पड़ाव हो  ज़िन्दगी के उतार-चढ़ाव में  तुम ठहराव हो 
रहूँ साथ तेरे उम्र भर  ऐसी खवाहिशनहीं मेरी जेहन में रखना कुछ ऐसी तलब है तेरी 
नशा उतरे न कभी  वैसी उम्दा शराब हो  ज़िन्दगी के उतार-चढ़ाव में  तुम ठहराव हो 
लगे मीठी फरवरी में  वो सौंधी-सौंधी धुप तुम  श्रृंगार करूँ लाखों के  पर मेरा रूप तुम 
गुनगुनाओ जिसे दिन-रात  तुम वो अलाप हो  ज़िन्दगी के उतार-चढ़ाव में  तुम ठहराव हो

बस अकेलापन कुछ यूँ मुझे सताता है...

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शाम के बाद घड़ी चलती है,
पर वक़्त ठहर जाता है,
बस अकेलापन,
कुछ यूँ मुझे सताता है!

दिल बहलाने के लिए,
चाय में अदरक डाली,
पर हर घूँट में,
तेरा बिस्कुट डुबोना याद आता है!
बस अकेलापन,
कुछ यूँ मुझे सताता है!

सोचा कैद करूँ,
ढलते सूरज के नायाब रंग,
फ़ोन के वॉलपेपर पे तेरी तस्वीर देख,
दिल सहम जाता है!
बस अकेलापन,
कुछ यूँ मुझे सताता है!

कभी बातें करती हूँ दोस्तों से,
संभालने के लिए,
पर तुम होते तो खामोशी भी सुनते,
यह सोच मन बिखर जाता है!
बस अकेलापन,
कुछ यूँ मुझे सताता है!

करवटें बदलती हूँ रात भर,
रात भर देखती हूँ घड़ी को,
तुम किसी और के बिस्तर पे हो,
यह ख्याल अंदर तक खोखला कर जाता है!
बस अकेलापन,
कुछ यूँ मुझे सताता है,
शाम के बाद घड़ी तो चलती है,
बस वक़्त ठहर जाता है!

Rewind - April 2020

Like March, April 2020 was unkind to this planet. I worked, studied and had very little to write poetry. This is all I could manage to write.


Date Content 04/08/2020 Kis kaam ke rishte wo Jo sirf kaam aane pe yaad karte hai
किस काम के रिश्ते वो जो सिर्फ काम आने पे याद करते है 04/09/2020 देने वाले की हैसियत है साहब कोई प्यार देता है, कोई धोखा
Dene wale ki haisiyat hai sahab Koi pyaar deta hai, koi dhokha 04/11/2020 तेरा ज़िक्र होते ही  गुनगुनी शाम भी थरथराने लगी
Tera zikr hote hi Gunguni shaam bhi thartharane lagi 04/12/2020 उसकी तारीफ के लिए मेरे पास लफ्ज़ कम पड़ जाते हैं  और लोग पूछते हैं कि वो अपनी ख़ूबसूरती पे इतना क्यों इतराते है  04/13/2020 अगर तस्वीरें सच बता पाती  तो शायर बेरोज़गार हो जाते 
Agar tasveerein sach bata pati To shayar berozgaar ho jaate 04/13/2020 कल रात चाँद कुछ ऐसे शरमाया  कि उसने बादलों का घूंघट औढ़ लिया  04/13/2020 तुम चाय, मैं पार्ले-जी हर वक़्त तुम में डूबने को तैयार बैठी हूँ 

Rewind - March 2020

I didn't write much this month. Covid-19 gave me many sleepless nights. I wish it just goes away miraculously. Maintain social distance and stay safe everyone.

Date Content 03/02/2020 गीली मिट्टी की ख़ुशबू की तरह दो आँसू क्या गिरे तेरी यादें महक गई
Geeli mitti ki khushboo ki tarah Do aansoo kya gire teri yaadein mehak gayi 03/05/2020 दर्द पीते-पीते इतने थक गये  चार घूँट शराब मरहम बन गयी 
Dard peete-peete itne thak gaye Chaar ghoont sharab marham ban gayi 03/12/2020 दो अपनों के बीच इतनी दूरी  एक ही घर में गैरों की तरह रहते हैं
Do apno ke beech itni doori Ek hi ghar mein gairon ke tarah rehte hain 03/16/2020 तुम इश्क़ की तीली लगा कर तो देखो  मैं सस्ती बीड़ी की तरह जलने को तैयार हूँ 
Tum ishq ki teeli laga kar toh dekho Mein sasti beedi ki tarah jalne ko taiyaar hun 03/17/2020 Poets, lovers and artists strongly believe in the therapeutic power of two things - hugs and alcohol.