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Rewind - April 2020

Like March, April 2020 was unkind to this planet. I worked, studied and had very little to write poetry. This is all I could manage to write.


Date Content 04/08/2020 Kis kaam ke rishte wo Jo sirf kaam aane pe yaad karte hai
किस काम के रिश्ते वो जो सिर्फ काम आने पे याद करते है 04/09/2020 देने वाले की हैसियत है साहब कोई प्यार देता है, कोई धोखा
Dene wale ki haisiyat hai sahab Koi pyaar deta hai, koi dhokha 04/11/2020 तेरा ज़िक्र होते ही  गुनगुनी शाम भी थरथराने लगी
Tera zikr hote hi Gunguni shaam bhi thartharane lagi 04/12/2020 उसकी तारीफ के लिए मेरे पास लफ्ज़ कम पड़ जाते हैं  और लोग पूछते हैं कि वो अपनी ख़ूबसूरती पे इतना क्यों इतराते है  04/13/2020 अगर तस्वीरें सच बता पाती  तो शायर बेरोज़गार हो जाते 
Agar tasveerein sach bata pati To shayar berozgaar ho jaate 04/13/2020 कल रात चाँद कुछ ऐसे शरमाया  कि उसने बादलों का घूंघट औढ़ लिया  04/13/2020 तुम चाय, मैं पार्ले-जी हर वक़्त तुम में डूबने को तैयार बैठी हूँ