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Rewind - October 2022

I think writing poetry has taken a backseat for a while. I have re-written my book this year. Editing is still a challenging task, though. I started doing other things - I ventured into making reels and I did my free Webinar last Saturday. Both of these have been creatively satisfying. But still I want to write more Hindi couplets. The reason is if I am out of practice, it gets difficult to sum up emotions in 2 lines. God willing, in November I will write more. This is what I wrote in October: Date Published 10/16/2022 तुम्हारी आदत चाय सी है  कमबख़्त कितनी भी कोशिश कर लूँ छूटती ही नहीं 10/18/2022 तुम नँगे पाँव किनारे पर क्या चली सुलगती रेट में उफान आ गया घर वाले करते है हर बात पे पैसे की बात अपने घर में महसूस होती है मुझे अब फकीरो सी औकात फ़कीरियत सी महसूस होती है अपने ही घर में मुझे जब घर वाले बात बात पे पैसे की बात करते है जब घर वाले बात बात पे पैसे की बात करते है अपने ही घर में फ़कीरियत सी महसूस होती है मुझे आज तक किसी से कुछ नहीं लिया पर तुझसे बार बार इश्क़ मांगता हूँ ये महज़ दिल्लगी न

Webinar on Writing Couplets (Hindi)

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Yesterday I conducted my first free webinar. It was an amazing experience. I enjoyed it and I hope others felt the same way. Please check the recording on my YouTube channel. I promised to answer the questions I couldn’t answer during the webinar. So here are my replies: Writing about romance – @VidushiBhardwaj - Try to write what you feel. Imagine the person is in front of you and then edit it.  Self-Thoughts - @NiteshKlair - Write it like a journal. Concentrate on feelings that are difficult. Make sure you pen those.  Where do you get inspiration from? - @KiranUmrao - Music Romantic lines with little humour – @NeelamGupta - Think you are having a conversation with your partner and write your first 3 thoughts. It helps in getting the first draft. How to end any couplet. It always starts off very good but end bad. @ShitalDave - Try to write 4-5 versions of a couplet. Then pick the best and edit it.  तवाइफ @VanshikaTiwari - If you want to write about it, I’d say watch a documen

Rewind - September 2022

After a break of many months, I have started writing and posting regularly. And it feels good. I wrote a Hindi poem this week. You can read it here . I wrote the following in September: Date Published 09/06/2022 इश्क़ तो शायद किया भी हो भरोसा किया हुए ज़माना हो गया 09/07/2022 उम्र के साथ दिखना चाहे कम हो जाए पर लोगों के दिखावे साफ़-साफ़ नज़र आने लगते है 09/13/2022 वक्त की ठोकरों ने बस ये समझाया कौन जग में अपना और कौन पराया परेशान होते है लोग आज कल इस बात पे  कि दूसरे इतने खुश क्यूँ है 09/20/2022 रूह से रूह मिलने की बात करता था वो  पर एक मुश्किल आते ही उसने काँधा झटक लिया 09//25/2022 तुझसे दूर जाने की कोशिश जितनी मर्ज़ी कर लूँ  पर ज़िन्दगी तेरे बिना आगे बढ़ती ही नहीं  Tujhse door jaane ki koshish jitni marzi kar lun Par zindagi tere bina aage badhti hi nahin

वो 90 के दशक की आशिक़ी

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  वो पीले फूलों का बाग़ वो हल्के रंगो की शाम  तुम वही मिलना मुझसे  जिस मोड़ पे आख़िरी बार लिया था मेरा नाम इत्तेफ़ाक़ से मिले थे हम और शिद्दत से निभाया था हमने प्यार कहाँ वो 90 के दशक की आशिक़ी और कहाँ आजकल का हैशटेग-वैशटेग सा व्यापार दिन गुज़ारे थे साथ हमने  बांधा था सपनों का संसार कब सोचा था मैंने कि मैं रह जाऊँगी दिल्ली में और तुम बस जाओगे सात समुंदर पार  सुना है वहाँ बर्फ गिरती है खूब  लोग वहाँ चाय कम कॉफ़ी ज़्यादा पीते हैं  और यहाँ चाय की हर एक चुस्की पे जनाब कॉलेज के दिनों को हम लाखों बार जीते हैं  बहुत उधेड़ बून करती हूँ मैं बहुत सोचती हूँ तुम्हारे बारे में  तुम काफ़ी आगे बढ़ गाये और मैं रह गई किनारे पे  खनक आज भी है  तेरी मद्धम सी आवाज़ की ज़िंदा मेरी बचकानी बातों पे  तुमने नहीं किया था मुझे कभी शर्मिंदा  रेत से थे तुम  तुम्हें मुट्ठी में बांध नहीं पाई कहाँ सागर, कहाँ साहिल  और ये हज़ार मीलों की जुदाई सुना है तुम दिसंबर में आ रहे हो हर बार की तरह 4 हफ़्ते के लिए तुम हमेशा लाते हो महंगे तोहफे  और मैंने तुम्हे सिर्फ ताने ही दिए  क्या कोई नाम है इस रिश्ते का  क्या कोई हक़ है मेरा

Rewind - August 2022

I have not been very productive for a month now. But I am having a good time with my nephew. It's fun and insightful to watch a baby grow. There is so much adults can learn from them. I wrote only 2 couplets in August. Date Published 08/17/2022 वक़्त बदलते ही जो बदल जाए  ऐसे दोस्तों को बदल देना चाहिए  08/30/2022 कितना बड़ा धोखा मिला होगा उसे कि वो इश्क़ के नाम पे तिलमिला जाता है Hoping September will be a hell lot productive in terms of creative writing. Love, Saru

Rewind - July 2022

This is what I wrote in July + 35000 words. Damn, there is still no end in sight. Wish me luck, though. Date Published 07/02/2022 Aap haunsla rakhiye Manzil pe pahunchte hi Aapko apna safar Sabse zyada khoobsurat lagega Janaab udd toh sabhi sakte hai Bas pankh phailane ka junoon hona chahiye Maa ne kaha dhoop hai Maine maan liya Ab uske jitni thaandi chhanv Nahi di hai na aaj tak kisi ne 07/04/2022 जिसने मुझे मेरे बुरे वक़्त में सहलाया  वही मेरे दिल को भाया 07/07/2022 जो बेवज़ह ख़ुश हो  बस वो बंदा कमाल है ना घरवालों से कोई अपेक्षा ना दुनिया से उसे कोई सवाल है 07/11/2022 अब ले जितने इम्तिहान लेने है ज़िन्दगी पास फ़ैल का डर नौसिखियों को लगता है Ab le jitne imtihaan lene hai zindagi Pass-fail ka darr nausikhiyon ko lagta hai 07/22/2022 ऐसे दोस्त किस काम के जो साले मजाक ना उड़ाए और जिस दिन तुम्हारी ज़िन्दगी का सत्यानाश हुआ हो दो पेग दारु न पिलाये

यूँ दो चार घंटे के लिए नहीं

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फ़ुर्सत में मिलना मुझसे यूँ दो चार घंटे के लिए नहीं  सिर्फ़ हाल चाल नहीं पूछना बातें करनी है तुमसे कई देखना है तुम्हें एक टक शिकवे करने है तुमसे कई हज़ार जब नाराज़ हुए थे तुम मुझसे और जब छेड़ा था मुझे बीच बाज़ार चवन्नी-अठन्नी सा ढोंग मत करना मान लेना मेरे हर कहे को सुबकियाँ से काम मत चलाना बेहने देना ग़र आँसू बेहे तो  सख़्त होने का दिखावा छोड़ आना नुक्कड़ वाले बनिये की दुकान पे सिद्दत से एक बार बोल देना  कि गलती होती है इंसान से तुम मुझे छोड़ गए उसका तुम्हें कभी अफ़सोस हुआ है क्या मैं नहीं तुमसे पूछूँगी  कि मेरे बाद मेरी तरह किसी को छुआ है क्या  ना मैं इस युग की मीरा हूँ  ना हो तुम मेरे घनश्याम बस इश्क़ है तुमसे बेपन्नह मुझे बाक़ी सब कुछ है मुझमें आम  तुम भी सोचते होगे ना  यह तीली सा इश्क़, ज्वालामुखी कब हुआ यूँ समझ लो तुम्हारे जाने के बाद तुम्हारे ख़याल ने दिन में 100 बार मुझे छुआ अब गणित में तो तुम अव्वल हो हिसाब लगा ही लोगे पर सोच के आना जनाब  पिछले 15 सालों का हिसाब कैसे दोगे  तो आना बस फ़ुरसत में  यूँ दो चार घंटे के लिए नहीं  सिर्फ़ हाल चाल नहीं पूछना बातें करनी है तुमसे कई